डॉ. हुकमचंद भारिल्ल Ph. D. (जैन समाज के प्रसिध्ध वक्ता)

posted Nov 3, 2009, 10:44 PM by Amish Mehta   [ updated Nov 3, 2009, 10:44 PM ]
'क्रमबद्ध पर्याय' के विषय में (ब्र. हरिभाई संपादित) आत्मधर्म पढ़कर तो हमारे ह्रदय कपट खुल गए| ऐसा लगा की हमको कोई अपूर्व खजाना मिल गया, हम कृत्यकृत्य हो गए|